प्रतापगढ़ में खेत पर कब्जा, रास्ता बंद, जान से मारने की धमकी

अजमल शाह
अजमल शाह

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने गांवों में चल रहे जमीन विवादों की सच्चाई फिर उजागर कर दी है। यहां एक युवक ने आरोप लगाया है कि उसकी हिस्सेदारी वाली जमीन पर जबरन कब्जे की कोशिश की गई, रास्ता बंद किया गया और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी गई।

पीड़ित का कहना है कि जब उसने अपनी जमीन पर हो रहे कब्जे का विरोध किया, तो सामने वाले पक्ष ने न सिर्फ गाली-गलौज की बल्कि मारपीट पर उतारू हो गया। अब उसने पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर FIR दर्ज कराने की मांग की है। ये भी आरोप है, स्थानीय थाने पर उसकी शिकायत को नजरअंदाज किया गया।

क्या है पूरा मामला?

मामला प्रतापगढ़ जिले के लीलापुर थाना क्षेत्र के एक गांव का बताया जा रहा है। शिकायतकर्ता प्रदीप कुमार सिंह ने आरोप लगाया है कि 23 अप्रैल 2026 की सुबह करीब 6:45 बजे उसकी साझा भूमि पर दूसरे पक्ष के लोगों ने अपने हिस्से से ज्यादा जमीन कब्जाने की नीयत से सामान रख दिया। आरोप है कि खेत तक जाने वाले रास्ते में अरहर का डंठल और अन्य सामान डालकर रास्ता भी बंद कर दिया गया, ताकि आने-जाने में परेशानी हो। जब शिकायतकर्ता मौके पर पहुंचा और विरोध किया, तब विवाद बढ़ गया।

विरोध किया तो मिली धमकी?

पीड़ित के मुताबिक, विरोध करने पर आरोपियों ने गाली-गलौज शुरू कर दी और मारपीट की कोशिश की। इतना ही नहीं, जान से मारने की धमकी भी दी गई। शिकायत में कहा गया है कि घटना की सूचना तत्काल डायल 112 पर दी गई थी। पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को समझाकर शांत कराया।

लेकिन शिकायतकर्ता का आरोप है कि पुलिस के सामने भी धमकियां दी गईं और जाते-जाते रास्ते में निपटाने की बात कही गई। जब कानून सामने हो और डर फिर भी बाकी रहे, तब सिस्टम पर सवाल उठते हैं।

वीडियो सबूत होने का दावा

शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया है कि गाली-गलौज और धमकी का वीडियो उसके पास मौजूद है। यही वजह है कि उसने मामले में निष्पक्ष जांच और FIR दर्ज करने की मांग की है। गांवों में जमीन विवादों में अक्सर सबूत की कमी होती है, लेकिन अगर वीडियो मौजूद है तो जांच की दिशा बदल सकती है। अब देखने वाली बात होगी कि पुलिस इस दावे की पुष्टि कैसे करती है।

गांवों में क्यों बढ़ रहे ऐसे विवाद?

उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में ग्रामीण इलाकों में जमीन विवाद लगातार बढ़ते जा रहे हैं। सीमांकन, बंटवारा, रास्ते का अधिकार और कब्जे जैसे मुद्दे अक्सर हिंसक झगड़े में बदल जाते हैं। समय पर राजस्व निस्तारण, साफ रिकॉर्ड और स्थानीय प्रशासन की तत्परता से ऐसे विवाद कम हो सकते हैं।

लेकिन जब कार्रवाई देर से होती है, तो तनाव बढ़ता है और फिर एक खेत पूरा गांव जला देता है।

पुलिस से क्या मांग?

पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक को दिए प्रार्थना पत्र में मांग की है कि मौके की जांच कर उचित कानूनी कार्रवाई की जाए और FIR दर्ज की जाए। अब निगाहें पुलिस प्रशासन पर हैं कि शिकायत पर कितनी तेजी से कदम उठाया जाता है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला सिर्फ जमीन कब्जे का नहीं बल्कि धमकी और शांति भंग करने का भी बन सकता है।

ग्रामीण भारत में आज भी सबसे बड़ी लड़ाई कई बार राजनीति नहीं, जमीन की लकीर होती है। एक मेड़ इधर-उधर हुई नहीं कि रिश्ते दुश्मनी में बदल जाते हैं। प्रतापगढ़ का यह मामला भी वही कहानी कह रहा है—जहां खेत छोटा है, लेकिन विवाद बड़ा।

कागज पर बंटी जमीन, जमीन पर अब भी अधूरी है।

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नोट- कुछ वीडिओ में गन्दी गलियों का प्रयोग है इसलिए उन्हें अपलोड नहीं किया गया है।

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